Posts

Showing posts from July, 2017

रुद्रष्टकम्॥

Image
रुद्राष्टकम्॥ यह है रुद्राष्टक तुलसीदास जी ने रामचरीतमानस में स्तुती किया है। यह भगवान श्री राम जी के द्बारा किया गया स्तुती हैं। कहा जाता है की माता पार्वती जी ने भगवान शंकर जी को शान्त करने के लिए किया था एेसा भी कहा जाता है। नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं॥ निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं॥1॥ भावार्थ:-हे मोक्षस्वरूप, विभु, व्यापक, ब्रह्म और वेदस्वरूप, ईशान दिशा के ईश्वर तथा सबके स्वामी श्री शिवजी मैं आपको नमस्कार करता हूँ। निजस्वरूप में स्थित (अर्थात्‌ मायादिरहित), (मायिक) गुणों से रहित, भेदरहित, इच्छारहित, चेतन आकाश रूप एवं आकाश को ही वस्त्र रूप में धारण करने वाले दिगम्बर (अथवा आकाश को भी आच्छादित करने वाले) आपको मैं भजता हूँ॥1॥ * निराकारमोंकारमूलं तुरीयं। गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं॥ करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसारपारं नतोऽहं॥2॥ भावार्थ:-निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय (तीनों गुणों से अतीत), वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों से परे, कैलासपति, विकराल, महाकाल के भी काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे आप परमेश्वर को...

(चर्पटमञ्जरीकास्तोत्रम्) भजगोविन्दं स्तोत्रम्

Image
॥चर्पटमञ्जरीकास्तोत्रम्॥ शंकराचार्य कृत। This Stotra wrote by Aadi shankaracharya. भज गोविन्दं भज गोविन्दं गोविन्दं भज मूढमते । सम्प्राप्ते सन्निहिते काले नहि नहि रक्षति डुकृङ्करणे ॥ १॥ Worship Govinda, worship Govinda, worship Govinda, Oh fool ! Rules of grammar will not save you at the time of your death. मूढ जहीहि धनागमतृष्णां कुरु सद्बुद्धिं मनसि वितृष्णाम् । यल्लभसे निजकर्मोपात्तं वित्तं तेन विनोदय चित्तम् ॥ २॥ Oh fool ! Give up your thirst to amass wealth, devote your mind to thoughts to the Real. Be content with what comes through actions already performed in the past. नारीस्तनभरनाभीदेशं दृष्ट्वा मा गा मोहावेशम् । एतन्मांसवसादिविकारं मनसि विचिन्तय वारं वारम् ॥ ३॥ Do not get drowned in delusion by going wild with passions and lust by seeing a woman's navel and chest. These are nothing but a modification of flesh. Fail not to remember this again and again in your mind. नलिनीदलगतजलमतितरलं तद्वज्जीवितमतिशयचपलम् । विद्धि व्याध्यभिमानग्रस्तं ...