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अच्युताष्टकम् (Achyutashtakam)

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                 अच्युताष्टकम्                  जय श्री कृष्ण                   आच्युताष्टक आदी शंकराचार्यद्बारा स्तवीत श्रीकृष्णचन्द्र प्रभु का स्तवन है । अच्युत का अर्थ कभी भी क्षीण न होनेवाला अर्थ होता है । सरस स्तवन का अानन्द लिजीए। अच्युतं केशवं रामनारायणं  कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् । श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं  जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे ॥ अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं  माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम् । इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं  देवकी नन्दनं नन्दजं सन्दधे ॥ विष्णवे जिष्णवे शङ्खिने चक्रिणे  रुक्मणीरागिणे जानकी जानये । वल्लवीवल्वभायार्चितायात्मने  कंशविध्वंसिने वंशिने ते नमः ॥ कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण  श्रीपते वासुदेवाजित  श्रीनिधे । अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज  द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक ॥ राक्षसक्षोभितः सीतया शोभितो  दण्डकरण्यभूपुण्यताकारणः । लक्ष्मणेनान्वितो वानरैः सेवितो  ऽगस्त्यसम्पूजि...

रुद्राभिषेक द्रब्य काम्यकर्म प्रयोग।

रुद्राभिषेक द्रब्य, किस पदार्थ द्बाराशमकार जी का अभीषेक करने से कौनसा कार्य सिद्ध होगा। किस द्रव्य से अभिषेक करने से क्या फल मिलता है अर्थात आप जिस उद्देश्य की पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक करा रहे है उसके लिए किस द्रव्य का प्रयोग करना चाहिए इसका उल्लेख शिव पुराण में किया गया है उसका सविस्तार विवरण प्रस्तुत कर रहें हैं अगर आप शास्त्रोक्त प्रमाण में पूर्ण श्रद्धा के साथ विविध द्रव्यों द्वारा रुद्राभिषेक कराये तो आपको पूर्ण लाभ मिलेगा। श्लोक जलेन वृष्टिमाप्नोति व्याधिशांत्यै कुशोदकै दध्ना च पशुकामाय श्रिया इक्षुरसेन वै। मध्वाज्येन धनार्थी स्यान्मुमुक्षुस्तीर्थवारिणा। पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात।। बन्ध्या वा काकबंध्या वा मृतवत्सा यांगना। जवरप्रकोपशांत्यर्थम् जलधारा शिवप्रिया।। घृतधारा शिवे कार्या यावन्मन्त्रसहस्त्रकम्। तदा वंशस्यविस्तारो जायते नात्र संशयः। प्रमेह रोग शांत्यर्थम् प्राप्नुयात मान्सेप्सितम। केवलं दुग्धधारा च वदा कार्या विशेषतः। शर्करा मिश्रिता तत्र यदा बुद्धिर्जडा भवेत्। श्रेष्ठा बुद्धिर्भवेत्तस्य कृपया शङ्करस्य च!! सार्षपेनैव तैलेन श...