रति मञ्जरी
।रति मञ्जरी। छोटा सा परिचय रति के बारे में:- कहें तो यह मुख्यतः काम शास्त्र का ग्रन्थ है।ग्रन्थकार हैं जयदेव। रति कें ब्यावाहारिक पक्ष भी देखें काम मानव जीवन का अति ही आवश्यक पक्ष है, गृहस्त जीवन का तो अभिन्नतम व्यवाहार है। काम की सुन्दरता यह है की भोगों से विमुक्ती भी यही दिला सकता हैं, यदी आप योग दर्शन में निर्दिष्ट शौच का कर्मठता से पालन करें तो। यहाँ अतीशय रुप से भोग के पक्ष में मै नही हूँ, इस की सुन्दरता को नकार भी नही सकतें हैं, शरीर अशक्त होने पर चक्षु से रुप लावण्य का पान करने वाले बहुधा सुन्दरता प्रेमी जन भी हैं ही। अलं याहाँ कतीपय श्लोक जिन में स्त्रिपुरुष कि जातीयों का बर्णन तथा परिचयात्मक हैं वह तो सामुद्रिक शास्त्र के अध्येताओं के लिए भी उपयोगी होंगे। ॥ग्रन्थकृन्मङ्गलम्॥ नत्वा सदाशिवं देवं नागराणां मनोहरम्। रच्यते जयदेवेन सुबोधा रतिमञ्जरी॥१ रतिशास्त्रं कामशास्त्र तस्य सारं समाहृतम्। सुप्रबन्धं सुसंक्षिप्तं जयदेवेन भाष्यते॥२ ॥स्त्रीपुंसोर्जातिलक्षणम्॥ पद्मिनी चित्रिणी चैव शङ्खिनी हस्तिनी तथा। शशो मृगो वृषsश्वाश्च स्त्रीपुंसोर्जातिलक्षणणलम्॥३ ॥पद्मिनी लक्षणम्।...