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Showing posts from December, 2018

रति मञ्जरी

।रति मञ्जरी। छोटा सा परिचय रति के बारे में:- कहें तो यह मुख्यतः काम शास्त्र का ग्रन्थ है।ग्रन्थकार हैं जयदेव। रति कें ब्यावाहारिक पक्ष भी देखें काम मानव जीवन का अति ही आवश्यक पक्ष है, गृहस्त जीवन का तो अभिन्नतम व्यवाहार है। काम की सुन्दरता यह है की भोगों से विमुक्ती भी यही दिला सकता हैं, यदी आप योग दर्शन में निर्दिष्ट शौच का कर्मठता से पालन करें तो। यहाँ अतीशय रुप से भोग के पक्ष में मै नही हूँ, इस की सुन्दरता को नकार भी नही सकतें हैं, शरीर अशक्त होने पर चक्षु से रुप लावण्य का पान करने वाले बहुधा सुन्दरता प्रेमी जन भी हैं ही। अलं याहाँ कतीपय श्लोक जिन में स्त्रिपुरुष कि जातीयों का बर्णन तथा परिचयात्मक हैं वह तो सामुद्रिक शास्त्र के अध्येताओं के लिए भी उपयोगी होंगे। ॥ग्रन्थकृन्मङ्गलम्॥ नत्वा सदाशिवं देवं नागराणां मनोहरम्। रच्यते जयदेवेन सुबोधा रतिमञ्जरी॥१ रतिशास्त्रं कामशास्त्र तस्य सारं समाहृतम्। सुप्रबन्धं सुसंक्षिप्तं जयदेवेन भाष्यते॥२ ॥स्त्रीपुंसोर्जातिलक्षणम्॥ पद्मिनी चित्रिणी चैव शङ्खिनी हस्तिनी तथा। शशो मृगो वृषsश्वाश्च स्त्रीपुंसोर्जातिलक्षणणलम्॥३ ॥पद्मिनी लक्षणम्।...

नृसिंह कवचम्

नृसिंह कवचम्॥ विधि - नृसिंह कवच और महाकली कवच, हनुमत कवच, का मंगलवार, गुरुवार, शनिवार से पाठ शुरु करें, जो भी कार्य हो उसका संकल्प कर नित्य एक – २ पाठ करें जब आपका मनवांछित कार्य पूर्ण हो जावे तब नरसिंह भैरव के लिए सवासेर का रोट और माता के लिए सवासेर की कडाही करें !! ॐ नमोनृसिंहाय सर्व दुष्ट विनाशनाय सर्वंजन मोहनाय सर्वराज्यवश्यं कुरु कुरु स्वाहा ! ॐ नमो नृसिंहाय नृसिंहराजाय नरकेशाय नमो नमस्ते ! ॐ नमः कालाय काल द्रष्टाय कराल वदनाय च !! ॐ उग्राय उग्र वीराय उग्र विकटाय उग्र वज्राय वज्र देहिने रुद्राय रुद्र घोराय भद्राय भद्रकारिणे ॐ ज्रीं ह्रीं नृसिंहाय नमः स्वाहा !! ॐ नमो नृसिंहाय कपिलाय कपिल जटाय अमोघवाचाय सत्यं सत्यं व्रतं महोग्र प्रचण्ड रुपाय ! ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं ॐ ह्रुं ह्रु ह्रु ॐ क्ष्रां क्ष्रीं क्ष्रौं फट् स्वाहा ! ॐ नमो नृसिंहाय कपिल जटाय ममः सर्व रोगान् बन्ध बन्ध, सर्व ग्रहान बन्ध बन्ध, सर्व दोषादीनां बन्ध बन्ध, सर्व वृश्चिकादिनां विषं बन्ध बन्ध, सर्व भूत प्रेत, पिशाच, डाकिनी शाकिनी, यंत्र मंत्रादीन् बन्ध बन्ध, कीलय कीलय चूर्णय चूर्णय, मर्दय मर्दय, ऐं ऐं एहि एहि, मम येये ...